पशु परिचर नॉर्मलाइजेशन विवाद: निष्पक्षता पर सवालिया निशान

 पशु परिचर नॉर्मलाइजेशन विवाद: निष्पक्षता पर सवालिया निशान



हाल ही में घोषित पशु परिचर (Animal Attendant) परीक्षा परिणाम ने एक गंभीर बहस को जन्म दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को जिस उद्देश्य से लागू किया गया था, वह इस परीक्षा में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। खास तौर पर चौथी और छठी शिफ्ट के अंकों के बीच भारी अंतर ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

नॉर्मलाइजेशन: क्या है इसका असली मकसद?

नॉर्मलाइजेशन का मतलब होता है — जब परीक्षा विभिन्न शिफ्टों में हो और प्रश्न पत्रों का स्तर अलग-अलग हो, तब अंकों को एक समान मानक पर लाने के लिए गणितीय फार्मूला अपनाया जाता है। इसका उद्देश्य सभी परीक्षार्थियों को बराबरी का मौका देना होता है। लेकिन क्या जब यह प्रक्रिया ही पक्षपातपूर्ण हो जाए, तो इसका मकसद पूरा होता है?

चौथी और छठी शिफ्ट के बीच अंतर क्यों बना मुद्दा?

  • चौथी शिफ्ट के अभ्यर्थी, जिन्होंने 10 से 12 अंक प्राप्त किए थे, चयन सूची से बाहर कर दिए गए।

  • वहीं छठी शिफ्ट के कुछ अभ्यर्थियों को 20 से कम अंक पर भी चयनित घोषित किया गया।

  • यह अंतर सिर्फ अंकों का नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे का है।

अभ्यर्थियों की आवाज़ में उठती मांगें:

  1. नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  2. हर शिफ्ट की अलग-अलग कटऑफ सार्वजनिक रूप से घोषित की जाए।

  3. चौथी शिफ्ट के अंकों की पुनः जांच हो और यदि कोई त्रुटि मिले, तो परिणाम संशोधित किए जाएं।

  4. एक स्वतंत्र समिति बनाकर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की जांच करवाई जाए।

न्याय और निष्पक्षता की परीक्षा

जब एक छात्र दिन-रात मेहनत करता है, तो वह उम्मीद करता है कि उसे एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म मिलेगा। लेकिन यदि नतीजे ही संदेहास्पद हों, तो मेहनत का मोल कम हो जाता है। नॉर्मलाइजेशन एक तकनीकी प्रक्रिया है, लेकिन इसका अमल यदि सही ना हो, तो यह तकनीक अन्याय में बदल जाती है।

निष्कर्ष

पशु परिचर परीक्षा परिणाम में सामने आया यह नॉर्मलाइजेशन विवाद शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़ा करता है। प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों की आपत्तियों को गंभीरता से सुने और आवश्यक सुधार करे। पारदर्शिता, निष्पक्षता और न्याय – यही एक प्रतियोगी परीक्षा की बुनियाद होनी चाहिए।

"एक अंक भी निर्णायक होता है, और जब अंक गलत गणना से प्रभावित हों, तो संघर्ष अनिवार्य हो जाता है।"

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